कई परिवारों के लिए, नवरात्रि का सबसे जरूरी हिस्सा व्रत या आरती नहीं, बल्कि एक जलती हुई लौ है। अखंड ज्योति एक ऐसी अखंड लौ जो पहले दिन जलाई जाती है और नौ दिनों तक लगातार जलती रहती है। इसे इस बात का संकेत माना जाता है कि मां दुर्गा खुद घर में मौजूद हैं। यही वह हिस्सा भी है जिसकी लोगों को सबसे ज्यादा चिंता होती है। कौन सा घी? किस कोने में? और अगर यह रात के 3 बजे बुझ जाए तो क्या होगा?
इसे कब जलाएं?
अखंड ज्योति को रविवार, 11 अक्टूबर को घटस्थापना के दौरान, सुबह 6:19 से 10:12 बजे के शुभ मुहूर्त में जलाएं। ज्यादातर परिवार कलश स्थापना के ठीक बाद इसे जलाते हैं और देवी से प्रार्थना करते हैं कि वे दीपक स्वीकार करें और नौ दिनों तक घर में वास करें।
घी या तेल?
शुद्ध गाय का घी सबसे अच्छा विकल्प है। यह साफ जलता है और कहा जाता है कि इससे घर में शांति और समृद्धि आती है। कुछ परिवार इसकी जगह तिल के तेल का इस्तेमाल करते हैं, खासकर अगर यह उनकी परंपरा हो या घी उपलब्ध न हो। दोनों ही सही हैं। जरूरी बात यह है कि एक ही दीपक में दोनों को न मिलाया जाए। कई पंडित देवी के दाईं ओर घी का दीपक और बाईं ओर तेल का दीपक (अगर इस्तेमाल किया जा रहा हो) रखने की सलाह देते हैं। घी की मात्रा का अंदाजा लगाना भी जरूरी है। नौ दिनों तक दिन-रात जलने वाले बड़े दीपक में एक किलो से ज्यादा घी लग सकता है, इसलिए ज्यादा घी खरीदकर पास रखें।
किस दिशा में?
वास्तु के अनुसार, घर या पूजा स्थल का दक्षिण-पूर्वी कोना अग्नि तत्व का होता है। इसलिए अखंड ज्योति के लिए यह एक स्वाभाविक जगह है। लौ का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। इसे दक्षिण की ओर न रखें। पितृ पक्ष के दौरान, पूर्वजों के लिए दीये दक्षिण दिशा की ओर रखे जाते हैं। नवरात्रि देवी का त्योहार है, इसलिए दिशा भी बदल जाती है।
इसे सही तरीके से कैसे रखें?
पीतल या मिट्टी के बड़े दीपक का इस्तेमाल करें, जिस पर कांच का कवर हो। इसे चावल की छोटी सी ढेरी या थाली पर रखें, कभी भी सीधे ज़मीन पर न रखें। लंबी सूती बत्ती सबसे अच्छी रहती है। कुछ परिवार और ज्यादा पवित्रता के लिए कलावा को बत्ती में लपेटते हैं। पास में एक छोटा बैकअप दीया जलाकर रखें। यह सबसे काम की सलाह है। अगर मुख्य लौ कभी बुझ जाए, तो आप उसे पहले से जल रही लौ से दोबारा जला सकते हैं।
अगर यह बुझ जाए तो क्या करें?
सबसे पहले, घबराएं नहीं। हवा का झोंका, बत्ती का बहुत धीमा जलना, या घी खत्म हो जाना - ऐसा कई घरों में होता है। जैसे ही आपको पता चले, बैकअप दीये से इसे दोबारा जला लें। हाथ जोड़कर मां दुर्गा से गलती के लिए माफी मांगें और फिर अपनी पूजा जारी रखें। परंपरा में पूर्णता से ज्यादा भक्ति को महत्व दिया जाता है।
इसे सुरक्षित रखना
नौ दिनों तक खुली लौ के लिए सावधानी की जरूरत होती है, खासकर फ्लैटों में। दीये को पर्दों, पंखों और AC की हवा से दूर रखें और बच्चों व पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें। जलते समय घर को कभी भी पूरी तरह खाली न छोड़ें, जिन परिवारों को एक साथ बाहर जाना पड़ता है, वे आमतौर पर किसी पड़ोसी या रिश्तेदार से इसे देखने के लिए कहते हैं।
जब नवरात्रि खत्म हो
अखंड ज्योति को फूंक मारकर न बुझाएं। आखिरी पूजा के बाद, इसे अपने आप बुझने दें। जब यह ठंडी हो जाए, तो बची हुई बत्ती और घी को किसी पौधे की मिट्टी में या बहती नदी में डाल सकते हैं।















