जागरण के संवाददाता ने बलिया से रिपोर्ट किया। कोतवाली क्षेत्र में विकास भवन रोड स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर सोमवार को ड्रग विभाग की टीम ने अचानक छापा मारा। इस दौरान केंद्र में बिक्री के लिए उपलब्ध 28 प्रकार की गैर-पीएमबीआई दवाएं जब्त की गईं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 1 लाख रुपये बताई गई। यह कार्रवाई आईजीआरएस पर दर्ज एक शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें बताया गया कि जन औषधि केंद्र पीएमजेय योजना के तहत उपलब्ध दवाओं के साथ-साथ सामान्य दुकानों में मिलने वाली जेनेरिक दवाएं भी बेच रहा था। निरीक्षण के दौरान फार्मासिस्ट सत्येंद्र मौजूद पाए गए, जबकि प्रोपराइटर अलका श्रीवास्तव और नियुक्त फार्मासिस्ट उत्कर्ष सिंह गैरहाजिर थे। जांच में पता चला कि केंद्र में पीएमबीआई योजना के अलावा अन्य कंपनियों की दवाओं का भंडारण और विक्रय किया जा रहा था, जो नियमों का उल्लंघन है। औषधि विभाग की गहन जांच में कुल 28 प्रकार की गैर-पीएमबीआई दवाएं बरामद की गईं, जिन्हें तत्काल सरकारी हिरासत में ले लिया गया। जब्त दवाओं का मूल्य लगभग 1 लाख रुपये आँका गया। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की धारा 22(1)(डी) के तहत केंद्र पर दवाओं की खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जन औषधि केंद्र केवल पीएमबीआई द्वारा निर्धारित दवाओं के वितरण के लिए अधिकृत हैं, अतः बाहरी कंपनियों की दवाओं का स्टॉक गंभीर अनियमितता माना गया। नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिला ड्रग इंस्पेक्टर रजत पांडेय ने बताया कि शिकायत के आधार पर यह छापा मारा गया। केंद्र संचालक से दस्तावेज मांगे गए, परंतु कोई वैध प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका। जानकारी मिली है कि जन औषधि केंद्र का लाइसेंस धारक देवरिया निवासी है।







