एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। कोई गीत सिर्फ बोलों तक सीमित नहीं होता - ये किसी की उम्मीद, टूटे दिल की पीड़ा या यादों को समेटे होता है। आज हम आपको 'सोहर' (Sohar Geet) के बारे में बताने जा रहे हैं, जो उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में शादियों, जन्मोत्सवों और उत्सवों का अहम हिस्सा है। यह सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि भावनाओं और परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति है। विशेष रूप से 'पहिला सांस' नामक लोकगीत, जिसे मालिनी अवस्थी ने 2014-15 में रिकॉर्ड किया, सदियों पुरानी अवधी संस्कृति पर आधारित है। यह गीत नवजात शिशु के स्वागत, माता-पिता की अपार स्नेह और आशीर्वाद को व्यक्त करता है। हाल ही में इसका इस्तेमाल 'जॉनसन बेबी ऐड' में हुआ, जो प्रसव के बाद के संवेदनशील दौर को दर्शाता है। गीत की पहली पंक्ति - 'सौ बरस हो जिया तू, अखियानों के तारे, चांदी के पालना झुलाइब हो' - शिशु के दीर्घायु और सुखी भविष्य की कामना को दर्शाती है। यह उदाहरण इस बात का प्रमाण है कि भारतीय लोकसंगीत में निहित भावनात्मक गहराई किसी भी आधुनिक संगीत से अधिक शक्तिशाली है। आज यह सकारात्मक बात है कि बिहार की लोकधारा को ब्रांड्स जैसे जॉनसन बेबी वैश्विक पहचान दे रहे हैं।
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