उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बयानबाजी तेज होती दिख रही है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को बलिया में भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नाम बदलने वाले मुख्यमंत्री को इस बार जनता बदलने जा रही है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने के फैसले पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि नाम किसी की याद में रखा जाता है. लगता है कि इन्हें भरोसा नहीं है कि आगे कोई याद रखेगा या नहीं. अखिलेश यादव बलिया के गोसाईंपुर में सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी की तेरहवीं में शामिल होने पहुंचे थे. 25 सितंबर को लखनऊ में रामगोविंद चौधरी का निधन हो गया था. श्रद्धांजलि देने के बाद अखिलेश ने प्रदेश सरकार की नीतियों, अयोध्या के विकास, किसानों की समस्याओं और भाजपा के सहयोगी दलों की राजनीतिक स्थिति को लेकर कई सवाल उठाए.
नोएडा एयरपोर्ट के नाम पर तंज, बोले- जनता सरकार बदलने जा रही
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने के प्रस्ताव को योगी कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अखिलेश यादव ने इस फैसले पर तंज कसा. उन्होंने नामकरण की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि नाम किसी की याद में रखा जाता है. उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव के राजनीतिक माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है. अखिलेश ने कहा कि नाम बदलने वाले मुख्यमंत्री को इस बार जनता बदलने जा रही है. उनका निशाना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा सरकार पर था.
अयोध्या से चुनाव लड़ें मुख्यमंत्री योगी, अखिलेश ने दी सलाह
अयोध्या में विकास कार्यों और लोगों को मिले मुआवजे को लेकर अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में लोगों के मकान और दुकानें प्रभावित हुईं तथा जमीन लेने के बदले उचित बाजार मूल्य नहीं दिया गया. सपा प्रमुख ने चंदे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले 15 दिनों में दूध का दूध और पानी का पानी करने की बात कही थी. अखिलेश यादव ने कहा कि अगर भाजपा सरकार को अयोध्या में अपने काम पर इतना भरोसा है, तो मुख्यमंत्री को अगला विधानसभा चुनाव वहीं से लड़ना चाहिए. उन्होंने इसे चुनौती के बजाय सलाह बताया. ये आरोप अखिलेश यादव ने लगाए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित मामलों के आधिकारिक रिकॉर्ड और सरकार का पक्ष भी जरूरी है.















