सूरज में हुए एक बड़े विस्फोट के बाद धरती पर सौर तूफान आने की आशंका जताई जा रही है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, सूरज से निकली गर्म गैसों और ऊर्जा का बड़ा गुबार 9 से 11 अक्टूबर के बीच धरती के आसपास पहुंच सकता है. अगर इसका असर तेज हुआ, तो सैटेलाइट, जीपीएस और रेडियो सिग्नल में परेशानी आ सकती है. साथ ही, आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी भी देखने को मिल सकती है. ऐसे में सवाल है कि सूरज में आखिर क्या हुआ है और इस तूफान का धरती पर कितना असर पड़ सकता है?
सूरज में आखिर क्या हुआ है?
दरअसल, 8 अक्टूबर को सूरज के एक हिस्से में जोरदार विस्फोट हुआ. इस हिस्से को सनस्पॉट 4549 कहा जाता है. इस विस्फोट से बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकली, जिसे वैज्ञानिकों ने M6.7 श्रेणी का सोलर फ्लेयर बताया है. आसान भाषा में समझें तो सूरज से अचानक तेज ऊर्जा निकली, जिसका असर अंतरिक्ष में मौजूद चीजों पर पड़ सकता है.
इस विस्फोट के दौरान सूरज के वातावरण में एक बड़ी लहर भी उठी, जिसे सोलर सुनामी कहा जा रहा है. यह समुद्र में उठने वाली सुनामी जैसी नहीं होती, बल्कि सूरज की सतह पर गर्म गैसों और ऊर्जा के तेजी से फैलने से बनती है. इसके अलावा, सूरज से गर्म गैसों और मैग्नेटिक फील्ड का एक बड़ा गुबार भी निकला है. वैज्ञानिकों की नजर इसी पर है, क्योंकि अगर यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र तक पहुंचता है, तो वहां हलचल पैदा कर सकता है.
क्या होता है सोलर तूफान?
सोलर तूफान को आसान भाषा में समझें तो यह सूरज से निकलने वाली तेज ऊर्जा और गर्म गैसों का बड़ा गुबार होता है. जब सूरज में कोई बड़ा विस्फोट होता है, तो वहां से ऊर्जा और बिजली से चार्ज छोटे-छोटे कण अंतरिक्ष में फैलने लगते हैं. कई बार सूरज से गर्म गैसों का बड़ा बादल भी निकलता है, जो धरती की तरफ आ सकता है. जब ये कण और गैसें धरती के मैग्नेटिक फील्ड से टकराकर उसमें हलचल पैदा करती हैं, तो इसे सौर तूफान कहा जाता है. इसका असर तूफान की ताकत के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है. तेज सौर तूफान से सैटेलाइट, जीपीएस और रेडियो सिग्नल में परेशानी आ सकती है. वहीं, कुछ परिस्थितियों में आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी भी दिखाई दे सकती है.
क्या भारत में दिखाई देगी रंगीन रोशनी?
सौर तूफान की खबर के बीच कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या भारत में भी आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी दिखाई देगी? दरअसल, इस रोशनी को ऑरोरा (Aurora) कहते हैं. यह तब बनती है, जब सूरज से आए कण धरती के ऊपरी वातावरण में मौजूद गैसों से टकराते हैं. आमतौर पर यह नजारा पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के आसपास दिखाई देता है. बहुत तेज सौर तूफान के दौरान यह रोशनी सामान्य से दूर के इलाकों में भी नजर आ सकती है. हालांकि, भारत में इसे देख पाना मुश्किल है और इस बार यहां यह रोशनी दिखाई देगी या नहीं, इसकी अभी कोई पक्की जानकारी नहीं है. यह पूरी तरह सौर तूफान की ताकत और उसकी दिशा पर निर्भर करेगा.
धरती पर क्या असर होगा?
सूरज से आने वाले इस तूफान का असर धरती पर कई तरह से पड़ सकता है. अगर तूफान तेज हुआ, तो सैटेलाइट के काम करने में परेशानी आ सकती है. इससे जीपीएस की मदद से रास्ता खोजने वाली सेवाओं की सटीकता भी प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा, रेडियो सिग्नल में रुकावट आ सकती है और बहुत तेज तूफान की स्थिति में बिजली की बड़ी लाइनों पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ये सारी परेशानियां जरूर होंगी. असल में कितना असर पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सौर तूफान कितना तेज है और उसका धरती के चुंबकीय क्षेत्र पर कितना प्रभाव पड़ता है.















