नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से जारी गिरावट को लेकर देश में राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा सरकार की नीतियों और आर्थिक स्थिति पर उठाए जा रहे सवालों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विदेशी निवेशकों (FPIs/FIIs) का भरोसा डिगा है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे राजनीतिक बयानबाजी के बजाय वैश्विक और आर्थिक कारण मुख्य वजह हैं।
विपक्ष के आरोप और राजनीतिक हलचल
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों, रोजगार और बाजार की स्थिति को लेकर हमलावर रहे हैं। उनके बयानों के बाद बाजार में आ रही गिरावट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों का दावा है कि सरकार की नीतियों से विदेशी निवेशकों का भरोसा कम हो रहा है, जिससे बाजार से लगातार पूंजी बाहर जा रही है।
आर्थिक विशेषज्ञों का क्या है कहना?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशक राजनीतिक बयानों के बजाय मुख्य रूप से वैश्विक ब्याज दरों, वैल्यूएशन और कंपनियों के प्रदर्शन को देखकर फैसले लेते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट के 5 बड़े कारण निम्नलिखित हैं:
चीन के आर्थिक पैकेज का असर:
चीन सरकार द्वारा घोषित बड़े आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज के कारण विदेशी फंड्स भारतीय बाजार से पैसा निकालकर चीन के सस्ते बाजारों में लगा रहे हैं।
भारतीय शेयरों का महंगा मूल्यांकन (High Valuation):
भारतीय शेयर बाजार लंबे समय से रिकॉर्ड स्तर पर थे, जिसके चलते शेयर काफी महंगे हो गए थे। ऐसे में विदेशी निवेशकों ने मुनाफावसूली (Profit Booking) को प्राथमिकता दी।
अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और बॉन्ड यील्ड:
अमेरिकी बॉन्ड Yield में बढ़त के कारण विदेशी निवेशकों को वहां सुरक्षित और बेहतर रिटर्न मिल रहा है, जिससे वे इमर्जिंग मार्केट्स से फंड निकाल रहे हैं।
कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव का जोखिम:
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का खतरा बना हुआ है, जिसका भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
सुस्त तिमाही नतीजे:
हालिया तिमाहियों में कई बड़ी भारतीय कंपनियों के वित्तीय परिणाम बाजार की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे हैं।















