फरवरी के अंत से भारतीय शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजराइल और ईरान के युद्ध के बाद भारतीय बाजार वैश्विक साथियों की तुलना में सबसे ज्यादा गिरने वालों में शामिल हो गए हैं। बीते एक महीने में BSE Sensex 7.33% यानी 5,796.64 अंक गिरा है, जबकि Nifty 50 7.22% या 1,767 अंक लुढ़क चुका है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, महंगाई की आशंका और विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। इससे निवेशकों के पोर्टफोलियो पर सीधा असर दिख रहा है और रिटर्न को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
हालांकि मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव खत्म होते ही बाजार में तेज रिकवरी आ सकती है। Pace 360 के को-फाउंडर और चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट अमित गोयल ने बताया कि वो ETF में निवेश को बेहतर विकल्प मानते हैं।
अमित गोयल ने सुझाव दिया कि अगर कोई निवेशक 15 दिनों के लिए 1 लाख रुपये निवेश करना चाहता है, तो 60% रकम Nifty ETF में, 20% Junior BeES ETF में और 20% प्राइवेट बैंकिंग ETF में लगानी चाहिए।
गोयल के मुताबिक, Nifty ETF को ज्यादा वेटेज देना चाहिए क्योंकि इसमें 7-8% तक रिटर्न की संभावना है। उनका कहना है कि Nifty की गिरावट कई व्यक्तिगत शेयरों के मुकाबले कम रही है, जो बाजार के लिए एक संकेत भी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि मेरा मानना है कि सबसे खराब दौर अभी बहुत दूर नहीं है यानी बाजार में और गिरावट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
मौजूदा हालात में बाजार दबाव में है, लेकिन ETF जैसे डायवर्सिफाइड निवेश विकल्प जोखिम को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं। युद्ध और कच्चे तेल की दिशा फिलहाल बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।















