जागरण संवाददाता, बांदा। बिसंडा थाना क्षेत्र के ओरन गांव के दो किशोरों ने अपहरण की घटना और जंगल से भागकर झांसी पहुंचने की साहसिक कहानी सुनाई, जिसने सभी को चकित कर दिया। किशोरों का दावा है कि 28 मई को गत गुरुवार को उन्हें उनके गांव से कार में बैठाकर जंगल ले जाया गया। जंगल में हाथ बांधे जाने के बाद, मौका मिलते ही दोनों भाग निकले और रेल की आवाज़ का सहारा लेकर पटरी तक पहुंचे। पटरी पकड़कर चलते-चलते झांसी रेलवे स्टेशन पहुंच गए। इसके बाद जीआरपी और चाइल्ड हेल्पलाइन की सहायता से शुक्रवार रात को उनके परिवार ने उन्हें घर वापस ले लिया। ओरन निवासी शिवकुमार का 15 वर्षीय पुत्र सुनील और पड़ोसी दशरथ का 16 वर्षीय पुत्र पवन गांधी सरकारी इंटर कॉलेज में पढ़ते हैं। दोनों घनिष्ठ मित्र हैं। सुनील ने इस वर्ष कक्षा नौ उत्तीर्ण कर दसवीं में प्रवेश किया है, जबकि पवन ने दसवीं पास कर 11वीं कक्षा में दाखिला लिया है। कैथा खाते समय पेट्रोल पंप का रास्ता पूछकर बनाया निशाना। किशोरों के अनुसार, 28 मई की सुबह दोनों नहाने के बाद मंदिर में दर्शन करने गए थे। वापसी में घर के पीछे पेड़ के नीचे पड़े कैथा को खा रहे थे। तभी काले शीशों वाली एक सफेद कार रुकी। कार में बैठे युवकों ने पेट्रोल पंप का रास्ता पूछा। रास्ता बताने के लिए दोनों किशोर कार के पास पहुंचे तो उनके मुंह पर रुमाल रखकर कार में ले लिया गया। होश आने पर वे जंगल में पाए और चारों ओर जंगल देखकर डर गए। पवन ने बताया कि होश में आने पर दोनों ने खुद को कार में पाया और कार जंगल में थी। कुछ दूरी पर ले जाकर उनके हाथ पीछे से रस्सी से बांध दिए गए। वहाँ पहले से दो अन्य किशोर मौजूद थे, जिनके हाथ बंधे थे और सिर से खून बह रहा था। सुनील ने बताया कि एक युवक ने चाकू दिखाया तो कुछ देर बाद पहले से मौजूद दो किशोर भाग निकले। उन्हें पकड़ने के लिए तीनों युवक दौड़ पड़े। इस बीच उन्होंने भी दूसरी दिशा में भागने का फैसला किया। हाथ बंधे होने के बावजूद दोनों लगातार भागते रहे। जंगल में लगभग दो घंटे तक भागते रहे। रेलवे पटरी तक पहुंचकर एक-दूसरे की रस्सियों को खोला। ट्रेन की आवाज सुनकर उन्हें लगा कि आसपास रेलवे लाइन या स्टेशन होगा। आवाज की दिशा में बढ़ते गए और पटरी तक पहुंच गए। पटरी पर पहले एक-दूसरे की रस्सियाँ खोलीं और फिर रेलवे लाइन के सहारे आगे बढ़े। रास्ते में धीरे-धीरे गुजरती ट्रेन देखकर उन्हें विश्वास हुआ कि कोई स्टेशन नजदीक है। काफी दूरी तय करने के बाद झांसी स्टेशन पहुंच गए। सुनील के पास मौजूद 50 रुपये से दोनों ने समोसे खाए। लोगों से पूछते हुए जीआरपी थाने पहुंचे और पूरी घटना बताई। जीआरपी ने चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचित किया, जिसके बाद किशोरों को सुरक्षा में ले लिया गया। रेल की आवाज उनके लिए जीवनदान साबित हुई। इस बीच, शाम तक बच्चों के घर न लौटने पर परिवार तलाश में जुट गए। रिश्तेदारों और परिचितों से जानकारी लेने के बाद पुलिस को सूचित करने की तैयारी चल रही थी। झांसी से फोन आने पर दोनों परिवारों को बच्चों के सुरक्षित होने की जानकारी मिली। इसके बाद सुनील के पिता शिवकुमार और पवन के पिता दशरथ रात में झांसी पहुंचे। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद किशोरों को उनके सुपूर्द कर दिया गया। शुक्रवार रात दोनों अपने परिवार के साथ घर लौट आए। बिसंडा थाना प्रभारी राममोहन राय ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है, लेकिन अभी तक कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। किशोरों का कहना है कि जंगल से निकलने के लिए वे लगभग दो घंटे तक लगातार भागे और रेल की आवाज उनके लिए जीवनदान साबित हुई।


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