राज्य सूचना ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी में प्रतिवर्ष औसतन 774.4 मिलीमीटर वर्षा होती है, परंतु इसका 85% हिस्सा नालों में बह जाता है। इस पानी के संचयन से भूजल स्तर में सुधार और साथ ही दिल्ली की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है। इस दिशा में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने एक व्यापक वर्षा जल संचयन अभियान शुरू किया है।
पहले चरण में 500 नए संचयन ढांचों के निर्माण के साथ-साथ नगर निगम दिल्ली (MCD), लोक निर्माण विभाग (PWD), दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB), शिक्षा निदेशालय और अन्य सरकारी विभागों की इमारतों में मौजूद निष्क्रिय प्रणालियों को पुनर्जीवित किया जाएगा। वर्ष 2001 से दिल्ली में 100 वर्ग मीटर या अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली लगाना अनिवार्य है। हालाँकि, नियमित रखरखाव की कमी के कारण अधिकांश सरकारी भवनों की प्रणालियाँ बंद पड़ी हैं। वर्तमान में 9148 सरकारी भवनों में से 7596 में ऐसी प्रणालियाँ मौजूद हैं, जिन्हें अब कार्यशील बनाया जाएगा।
इस अभियान के लिए निविदाएँ आमंत्रित की जा रही हैं और कार्यादेश जल्द ही जारी किए जाएँगे। पहले चरण के सभी कार्य 30 जून तक पूरे करने का लक्ष्य है। अनुमान है कि इससे प्रतिवर्ष 73 करोड़ लीटर से अधिक जल भूजल में रिचार्ज होगा। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि जल संरक्षण को जनभागीदारी में बदलना होगा। यह अभियान नई प्रणालियों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि मौजूदा प्रणालियों को सक्रिय करने और सरकारी संस्थानों को मिसाल कायम करने पर केंद्रित है।
दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए प्रभावी प्रबंधन और जनसहभागिता आवश्यक है। अभियान की निगरानी के लिए DJB एक डिजिटल पोर्टल विकसित कर रहा है, जो संचयन प्रणालियों की स्थापना, अनुपालन निगरानी और डेटा प्रबंधन में सहायक होगा। साथ ही, 59 सेवा प्रदाताओं को इन प्रणालियों के क्रियान्वयन और रखरखाव के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
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