पूर्वी दिल्ली के यमुनापार क्षेत्र में अवैध बहुमंजिला इमारतों का तेजी से निर्माण जारी है, जो विवेक विहार आग और सैदुलाजाब इमारत ढहने जैसी घटनाओं के बावजूद जानलेवा खतरा बनाए हुए हैं।
सौरभ पांडेय, पूर्वी दिल्ली। विवेक विहार में हुई आग और सैदुलाजाब में हुई हालिया दुर्घटना के कुछ ही दिनों के अंतराल में हुई ये घटनाएं चिंता का विषय हैं। यमुनापार में सैकड़ों ऐसी 'मौत की इमारतें' खड़ी की जा रही हैं, जो किसी भी पल हजारों लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। दुर्गापुरी, गांधी नगर, कृष्णा नगर, राजगढ़ कॉलोनी, लक्ष्मी नगर, न्यू अशोक नगर, पटपड़गंज, जगतपुरी और विवेक विहार जैसे इलाकों में बिना अनुमति के बहुमंजिला निर्माण तेजी से हो रहे हैं। इन इमारतों में न तो मानचित्रों का पालन किया जा रहा है और न ही सेटबैक नियमों का।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि एमसीडी के बिल्डिंग विभाग के अधिकारियों की चुप्पी और रिश्वत के कारण यह संभव हो पा रहा है। पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल ने बताया कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण युवाओं की जानें खतरे में हैं। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यमुनापार में भी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
एमसीडी के शाहदरा उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्र में पिछले छह महीनों में 950 से अधिक अवैध निर्माणों को नोटिस जारी किए गए, लेकिन किसी भी मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि इन इमारतों को पूरा होने में एमसीडी अधिकारियों की मिलीभगत शामिल है। नोटिस भेजे जाने के बावजूद इन्हें ध्वस्त नहीं किया जा रहा।
यमुनापार के मास्टर प्लान रोड के पास खुरेजी चौक की एक जर्जर इमारत में कई परिवार रह रहे हैं, जो किसी भी समय ढह सकती है। शास्त्री पार्क, वेलकम, सीलमपुर और जाफराबाद जैसे इलाकों में भी ऐसी इमारतों को लोहे के सहारे सहारा दिया गया है। पूर्वी जिला विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. अनिल गोयल और उत्तर पूर्वी जिला के अध्यक्ष जितेंद्र महाजन ने बताया कि एमसीडी अधिकारियों को अवैध निर्माण रोकने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कार्रवाई में देरी होती है, तो अधिकारियों पर कड़े कदम उठाए जाएंगे।


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