राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन द्वारा ईंधन अधिभार शुल्क (फ्यूल सरचार्ज) में की गई वृद्धि को लेकर आपत्ति जताई है। परिषद के अनुसार, यह कदम लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक दबाव का कारण बनेगा। उनका मानना है कि ईंधन अधिभार शुल्क से संबंधित मूल कानून में ही यह स्पष्ट किया गया था कि बिजली कंपनियों को मनमाने ढंग से शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी, जो आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज है।
परिषद ने बताया कि पावर कॉरपोरेशन ने हाल में दस प्रतिशत की वृद्धि का औचित्य अपीलेट ट्रिब्यूनल के कुछ आदेशों के तहत पुराने बकाए भुगतानों को बताया है। हालाँकि, परिषद का तर्क है कि यदि कोई पूर्व भुगतान या समायोजन लंबित था, तो उसे ट्रू-अप प्रक्रिया के माध्यम से ही समायोजित किया जाना चाहिए था।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि राज्य में बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का सरप्लस लगभग 51,000 करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है। इस स्थिति में शुल्क वृद्धि का कोई तर्कसंगत आधार नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े 'कंज्यूमर राइट रूल्स 2020' के तहत निर्धारित मुआवजा प्रावधानों को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति में चूक की स्थिति में प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया है।
अंत में, उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग से तत्काल हस्तक्षेप करने, ईंधन अधिभार वृद्धि के निर्णय की पुनर्विचार करने और उपभोक्ता हितों की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।


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