भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की 3.25 लाख करोड़ रुपये की मेगा डील को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा 12 फरवरी 2026 को मंजूरी दी गई। भारत 114 राफेल डील में IDC के माध्यम से स्वदेशी हथियार बनाने की ओर अग्रसर हो रहा है। इस प्रक्रम से देश का डिफेंस सेक्टर मजबूत होगा। इस डील के तहत 18 विमान फ्रांस से आएंगे और 96 भारत में बनाए जाएंगे। विमानों को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश में ही निर्मित किया जाएगा, जिसमें 25 % से अधिक स्वदेशी तकनीक का प्रयोग किया जाएगा।
भारत अपने डिफेंस सेक्टर को और मजबूत और एडवांस बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में भारत में भारत सरकार ने फ्रांस से 3.25 लाख करोड़ रुपये की कीमत पर 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। जिसमें से अधिकतर फाइटर जेट का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। साथ ही नेक्स्ट जेनरेशन फाइटर जेट बनाने के लिए AMCA परियोजना की शुरुआत की जाएगी, जिससे पांचवी और छठी पीढ़ी के लड़ाकू फाइटर जेट का निर्माण देश में ही किया जाए।
अब भारत सरकार 114 राफेल फाइटर जेट की इस मेगा डील में एक जरुरी शर्त जोड़ने जा रही है। इस शर्त के तहत यह तय किया जाएगा कि भारत में बनी मिसाइल और हथियारों को इन फाइटर जेट में आसानी से लगाया जा सके। इसलिए सरकार इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट (ICD) को समझौते का हिस्सा बना रही है। वहीं अगर बात की जाए ICD की तो यह एक प्रकार का तकनीकी कागजात होते है, जिसके द्वारा विमान के अलग-अलग सिस्टम के बीच सामंजस्य कैसे होगा, की पुष्टि करता है। आसान भाषा में, ICD यह तय करेगा कि राफेल में भारत में बने हथियारों को आसानी से और सही तरीके से इंस्टॉल कर सकें।
यह पूरी डील बाय एंड मेक मॉडल (Buy And Make Model) पर आधारित है, जिसमें कुल लागत लगभगह 3.25 करोड़ रुपये की बताई जा रही है। इस परियोजना के तहत 18 फाइटर जेट फ्रांस से तैयार होकर आएंगे, वहीं बाकी के 96 फाइटर जेट देश में ही बनाए जाएगें। जिसमें 25 % से अधिक स्वदेशी तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। अगले महीने रक्षा मंत्रालय की तरफ से फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट को प्रस्ताव (RFP) भेजा जा सकता है। इस डील को 12 फरवरी 2026 को डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) द्वारा मंजूरी मिल गई है।
इसी बीच यह खबरें निकल कर आ रही हैं कि डसॉल्ट कंपनी राफेल का सोर्स कोड देने से मना कर रही है। वहीं रक्षा मंत्रालय की तरफ से सफाई आयी है कि दुनिया का कोई भी देश अपने विमानों का सोर्स कोड किसी दूसरे देश को नहीं देता है। यह कंपनी की बौद्धिक संपत्ति होती है, जिसमें रडार, हथियार सिस्टम, फ्लाईट कंट्रोल और टारगेटिंग सिस्टम जैसे हिस्से सम्मलित होते हैं। अधिकारियों ने आगे बताया कि भारत के करीबी रक्षा साझेदार देश रूस और अमरीका भी अपने फाइटर जेट का सोर्स कोड नहीं साझा करते है। अधिकारियों ने इस बात को सामान्य बताया है।
भारत अभी अपनी रक्षा सुरक्षा सिस्टम को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए स्वदेशी परियोजनाओं को लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। इस परियोजना के तहत तेजस मार्क 1ए, लंबी दूरी की मिसाइलें और भविष्य का एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) शामिल है।
इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य आने वाले समय दूसरे देशों पर हथियारों की निर्भरता को कम किया जा सके। इस डील का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश में ‘मेक इन इंडिया’ का प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाए साथ ही देश रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और मजबूत बने।















