शामली। भारतीय किसान यूनियन चढूनी ने भारत सरकार द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए जा रहे प्रस्तावित व्यापार समझौते पर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति से किसी भी तरह का समझौता न किए जाने की मांग की है।
भारतीय किसान यूनियन चढूनी के जिलाध्यक्ष चौ. निखिल खैवाल के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत सरकार द्वारा विभिन्न देशों के साथ जो प्रस्तावित व्यापार समझौते किए जा रहे हैं अथवा विचाराधीन है, वे देश के किसानों के लिए गंभीर चिता का विषय है। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि व्यवस्था पहले से ही अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है जिनमें बढती महंगाई, फसलों का उचित मूल्य का अभाव, प्राकृतिक आपदाएं तथा कर्ज का बोझ आदि समस्याओं से जूझते हुए आत्महत्या तक के बदम उठा रहा है, ऐसे में यदि विदेशी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश दिया जाता है तो इससे देश के किसानों को भारी नुकसान उठाना पडेगा क्योंकि भारत की खेती आजीविका है जबकि विदेशों में खेती व्यापार है इसलिए सस्ते आयातित उत्पाद भारतीय किसानों की उपज की कीमतों को गिरा देंगे। उन्होंने कृषि और डेयरी व पोल्ट्री और किसानों से जुडे सहायक धंधों को किसी भ प्रकार के मुक्त व्यापार समझौते से बाहर रखा जाए। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने राष्ट्रपति से भी मांग की कि ऐसे किसी भी व्यापार समझौते को न किया जाए और किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इस अवसर पर पप्पू लपराना, सत्यप्रकाश बारी, सत्यबीर, सौराम सिंह आदि भी मौजूद रहे।















