शामली। शहर के धीमान पूरा स्थित दुकानदारों द्वारा मालिक पर लगाए गए आरोपों को लेकर दुकानों के मालिक द्वारा अपना पक्ष रखते हुए कहा गया है कि वह केवल अपना बचाव करने के लिए दुकानों की जर्जर अवस्था को देखते हुए दुकानों को खाली कराना चाह रहे है।जो भी वैध प्रक्रिया होगी वह प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप से होगी।उनके द्वारा किसी भी किरायेदार को किसी भी प्रकार की जोर जबरदस्ती व धमकी नहीं दी जा रही है।उन्होंने पुणे की एक कंपनी द्वारा बनाई गई स्ट्रक्चर रिपोर्ट को भी पेश किया जिसमे बिल्डिंग को पूरी तरह से जर्जर माना गया है।
गुरुवार को मुजफ्फरनगर निवासी डॉक्टर प्रणव गर्ग,भूषण गर्ग व ईश्वर स्वरूप ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता कर बताया कि शहर के धीमान पूरा स्थित बिल्डिंग सन 1950 में बनाई गई थी।जो फिलहाल 72 वर्ष होने के बावजूद पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है।उसमें बनाई गई दुकानों को 5 व 2 साल के एग्रीमेंटो पर दिया गया था।लेकिन 2022 से किरायेदारों द्वारा किराया देना बंद कर दिया गया और उल्टा दुकानों के मालिक पर ही मुकदमा कर दिया गया।लेकिन कोर्ट द्वारा दुकान मालिक के पक्ष में फैसला दिया गया।उन्होंने कहा कि वह केवल अपना बचाव करने के लिए बिल्डिंग को खाली कराना चाहते है।हाल फिलहाल में लखनऊ दिल्ली जैसे बड़े शहरों में जर्जर बिल्डिंगों के गिरने से बड़े हादसे हो चुके है।जिसमे किरायेदारों द्वारा मालिक के निर्दोष होने के बावजूद भी दोषी बनाया गया है।उन्होंने कहा कि वह दुकानों को खाली करवाने की पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक देख रेख में करवाना चाहते है।उनके द्वारा किसी भी दुकानदार को न तो कोई धमकी दी गई है और न ही किसी प्रकार का दुर्व्यवहा किया गया है। प्रशासन के निर्देश पर पुणे की एक कंपनी द्वारा स्ट्रक्चर रिपोर्ट तैयार कराई गई है।जिसमे बिल्डिंग को पूरी तरह से जर्जर माना गया है।इस रिपोर्ट को भी न्यायालय के साथ साथ प्रशाशन को भी सौंप दिया गया है।इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बराबर की बिल्डिंगों व आनेजाने वाले राहगिरी को भी जान माल का खतरा बना हुआ है।उन्होंने कहा कि कोर्ट और प्रशासनिक अधिकारी जो भी दिशा निर्देश देंगे उसका पूरी तरह से पालन किया जाएगा।दुकानदारों द्वारा उन पर जो भी आरोप लगाए गए है वह पूर्ण रूप से निराधार है।















