
रेलपार स्थित प्राचीन सदाशिव मंदिर में चल रही संगीतमय शिव कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पंडित दिनेश पाठक ने भगवान शिव की महिमा का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान शिव का गुणगान करता है, शिव उसका कल्याण करते हैं। सावन मास में भगवान शिव का नित्य एक लोटा जल से अभिषेक करने मात्र से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण वर्ष का पांचवां महीना है। इस माह में हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व आते हैं। पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। उन्होंने समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए कहा कि समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण कर लिया। उनके हृदय में भगवान श्रीराम विराजमान हैं, इसलिए विष का प्रभाव भगवान श्रीराम तक न पहुंचे, इसके लिए उन्होंने विष को कंठ में ही रोक लिया। इसी कारण भगवान शिव का एक नाम नीलकंठ पड़ा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक किया।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान शिव का परिवार आपसी प्रेम और सद्भाव का अद्भुत उदाहरण है। शिव परिवार के सभी सदस्यों की पूजा होती है और सभी के वाहन अलग-अलग हैं। इसके बावजूद वे एक-दूसरे के साथ मित्रभाव से रहते हैं। उन्होंने समाज में भी आपसी प्रेम, भाईचारे और मिल-जुलकर रहने का संदेश दिया। कथा के दौरान पंडित रवि पाठक और निशांत पाठक ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में डुबो दिया। कथा के मुख्य यजमान भाजपा नेता यशपाल पंवार सहपत्नी रहे। मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद संगल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।















