डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सेना ने सीमा पर निगरानी और सटीक सैन्य कार्रवाई की क्षमता बढ़ाने के लिए स्वदेशी स्टार्टअप होवरिट के 'दिव्यास्त्र एमके-1' ड्रोन का सफल परीक्षण किया है। यह ड्रोन एआई और उन्नत सेंसरों से लैस होकर 15 किलोग्राम तक के युद्ध सामग्री को ले जाने और लक्ष्य पर सटीक हमले करने में सक्षम है।
पहले सेना को खुफिया जानकारी जुटाने, घुसपैठ रोकने और हमले करने के लिए अलग-अलग संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता था। दिव्यास्त्र एमके-1 इन सभी कार्यों को एक ही मंच पर समाहित करता है। ऑपरेशन सिंदूर और अमेरिका-ईरान युद्ध में ड्रोन की सफलता के बाद भारतीय सेना इस तरह की स्वदेशी तकनीक पर जोर दे रही है। साथ ही, यह ड्रोन विदेशी प्रणालियों की तुलना में किफायती और स्वदेशी समाधान प्रदान करता है।
जोधपुर में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इस ड्रोन ने युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। एआई और सेंसरों से लैस यह ड्रोन दिन-रात वास्तविक समय में डेटा कमांड सेंटर तक पहुँचा सकता है। इससे सीमा पर संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने की गति और सटीकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
दिव्यास्त्र एमके-1 की प्रमुख विशेषता इसके 'लूजरिंग मिशन' कार्य है। यह लंबे समय तक हवा में मंडराने के बाद सही मौके पर सटीक हमला कर सकता है। यह ड्रोन 300-400 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ान भरता है और लगभग 5 घंटे तक हवा में रहकर 500 किमी के क्षेत्र की निगरानी कर सकता है। नियंत्रण रेखा (एलओसी), वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी), रेगिस्तानी इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी प्रभावशीलता को रेखांकित किया जा रहा है।
इसकी मोबाइल लॉन्च क्षमता से सेना इसे किसी भी स्थान से त्वरित तैनाती कर सकती है। परीक्षण के दौरान ड्रोन को कम समय में तैयार करके बार-बार लॉन्च किया गया। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, दिव्यास्त्र एमके-1 जैसी स्वदेशी प्रणालियाँ भविष्य की लड़ाइयों में सेना की निगरानी क्षमता बढ़ाने और विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। (एएनआई के इनपुट के साथ)


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