राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारत में आतंकवादी कार्यों को बढ़ावा देने के लिए मुंबई के अपराधी तत्वों और करांची स्थित खलनायक मुन्ना झिंगाड़ा के नेटवर्क का सहारा लेना शुरू कर दिया है। पहले स्थानीय गैंगस्टर शहजाद भट्टी के माध्यम से प्रयास किए जाने के बाद, सुरक्षा एजेंसियों को मुंबई अंडरवर्ल्ड के इस नए तालमेल की जानकारी मिली है। विशेष सेल और खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि आईएसआई के निर्देश पर काम करने वाले एक मॉड्यूल ने मुंबई और नेपाल में बड़ी संख्या में युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल किया है। इस संदर्भ में सुरक्षा एजेंसियों ने मुंबई और नेपाल में केंद्रित जांच शुरू की है।
मुन्ना झिंगाड़ा, जिसका असली नाम सैयद मुदस्सर हुसैन है, करांची में सक्रिय है। उसकी एक सहयोगी 'लामा' को विशेष सेल ने गिरफ्तार किया है। पिछले कुछ दिनों से दिल्ली, मुंबई, राजस्थान और पंजाब में चलाए गए ऑपरेशन्स के दौरान आईएसआई, दाऊद इब्राहिम और शहजाद भट्टी से जुड़े आठ आतंकियों को पकड़ा गया है। इन आतंकियों से मुन्ना और लामा के पूरे नेटवर्क की जानकारी प्राप्त करने के लिए गहन पूछताछ चल रही है। वर्तमान में इन आतंकियों को छह जून तक के लिए रिमांड प्राप्त है।
मुन्ना झिंगाड़ा को मुंबई अंडरवर्ल्ड के सबसे खतरनाक शूटरों में गिना जाता है। वह 2000 में छोटा राजन को खत्म करने के मिशन पर थाईलैंड (बैंकाक) गया था, जहाँ उसने एक बिजनेसमैन के भेष में छोटा राजन पर हमला किया। इस घटना के बाद थाई पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और भारत-पाकिस्तान के बीच लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2018 में थाई अदालत ने उसे भारतीय माना। मुन्ना के परिवार ने यूपी से 1950 के दशक में मुंबई के जोगेश्वरी में बसना शुरू किया था। 1990 के दशक में हत्या के मामले में जेल जाने के बाद वह छोटा शकील के संपर्क में आया और डी-कंपनी से जुड़ गया। पाकिस्तान ने थाईलैंड के सामने उसे मोहम्मद सलीम के नाम से पाकिस्तानी नागरिक बताकर वापसी का दबाव बनाया, लेकिन मुंबई पुलिस और भारतीय खुफिया एजेंसियों ने डीएनए और दस्तावेज़ी सबूतों के आधार पर उसकी भारतीय पहचान साबित की।



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