डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वैश्विक उथल-पुथल, पश्चिमी एशिया संकट के बाद ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधाओं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सशस्त्र गतिविधियों के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध एक नए चरण में प्रवेश कर चुके हैं। नई दिल्ली में आयोजित द्वितीय रक्षा मंत्रियों संवाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने द्विपक्षीय साझेदारी को नई गति प्रदान की। दोनों नेताओं ने इस बात पर बल दिया कि वर्तमान में दोनों देश रणनीतिक रूप से इतने निकट हैं जितना इतिहास में कभी नहीं।
दोनों देशों ने समुद्री मार्गों, हवाई संचार और निर्बाध समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित किया। इस बैठक का सर्वाधिक ठोस परिणाम रहा रक्षा उपकरणों के लिए समझौता इस उच्चस्तरीय चर्चा का प्रमुख परिणाम रहा। दोनों देशों ने सैन्य हार्डवेयर के सह-उत्पादन और संयुक्त विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया।
'ज्वॉइंट मैरीटाइम सिक्योरिटी कोलाबोरेशन रोडमैप' को अंतिम रूप देने तथा समुद्री गश्ती विमानों के माध्यम से समुद्री क्षेत्र की निगरानी क्षमता बढ़ाने पर सहमति बनी। साथ ही, इस वर्ष पहली 'ज्वॉइंट स्टाफ टॉक्स' शुरू करने का निर्णय लिया गया।
दोनों मंत्रियों ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों (विशेषकर यूएन समुद्री कानून सम्मेलन 1982) के तहत समुद्री स्वतंत्रता और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया। भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के 'क्वाड' समूह की बढ़ती भूमिका की सराहना की गई। गुरुग्राम स्थित 'इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर' के माध्यम से समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीतिक ढांचे विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। (पीटीआई के इनपुट के साथ)
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