दिल्ली हाईकोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में यह स्पष्ट किया है कि बैंकों द्वारा जारी सुरक्षा चेतावनियों के बावजूद संदिग्ध लिंक पर क्लिक करके पैसे खोने वाले ग्राहकों को स्वयं उत्तरदायी ठहराया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि बैंक की ओर से दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज करके ग्राहक द्वारा संदिग्ध लिंक दबाने पर पैसे की हानि की पूरी जिम्मेदारी ग्राहक की होगी।
2017 में आरबीआई द्वारा जारी एक सर्कुलर के अनुसार, यदि ग्राहक भुगतान प्रक्रिया के दौरान अपनी जानकारी साझा करते समय लापरवाही बरतता है, तो साइबर धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी ग्राहक की मानी जाएगी। इस मामले में, एक शिक्षाविद ने एसबीआई के बचत खाते से साइबर धोखाधड़ी के कारण 2.60 लाख रुपये की हानि की थी। एसबीआई ने रिफंड देने से इनकार करते हुए कहा कि लेनदेन वैध लॉगिन विवरण और ओटीपी के माध्यम से किए गए थे।
आरबीआई ने एसबीआई के रुख से आंशिक सहमति जताते हुए ग्राहक को एक-तिहाई राशि वापस देने का निर्देश दिया। हालाँकि, ग्राहक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की और एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। एसबीआई ने इस निर्णय को चुनौती दी। अपील पर सुनवाई करते हुए पीठ ने एकल पीठ के फैसले को रद्द करते हुए माना कि ग्राहक यह साबित नहीं कर पाया कि बैंक ने आरबीआई के दिशानिर्देशों का पालन करने में कोई कमी की थी।



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