नई दिल्ली। दिल्ली में तीन दशकों से ज्यादा समय से विरोध-प्रदर्शन की सबसे जानी-मानी जगह रहे जंतर-मंतर को अब प्रदर्शनों के लिए तय जगह की सूची से हटा दिया गया है। इसकी जगह दिल्ली पुलिस ने तीन नई जगहें तय की हैं, जहां नागरिक विरोध-प्रदर्शन कर सकते हैं। 11 अक्टूबर को जारी एक स्टैंडिंग ऑर्डर में, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने पूर्वी दिल्ली में रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान को विरोध-प्रदर्शन के लिए नई जगहें घोषित किया।
ये फैसला गृह मंत्रालय की कमेटी ने लिया
ऑर्डर में कहा गया है कि यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय की बनाई एक कमेटी की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। इस कमेटी को नागरिकों के विरोध करने के अधिकार के इस्तेमाल के लिए वैकल्पिक जगहों की जांच करने का काम सौंपा गया था। पुलिस ने कहा कि इन तीन जगहों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए एक विस्तृत और संशोधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) अलग से जारी किया जाएगा। यह ऑर्डर 28 अप्रैल, 2022 के पिछले स्टैंडिंग ऑर्डर में आंशिक बदलाव करता है।
संसद मार्ग इन लोगों की जमा होने की जगह बन गया
यह कदम जंतर-मंतर के लिए एक बड़ा बदलाव है, जिसे 1993 में दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगह बनाया गया था। समय के साथ, संसद मार्ग के पास का यह इलाका राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं, किसानों, छात्रों और ऐसे नागरिकों के जमा होने की जगह बन गया जो अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान खींचना चाहते थे।
अन्ना हजारे से लेकर पहलवानों के विरोध-प्रदर्शन तक
जंतर-मंतर भारत के कई अहम जन-आंदोलनों का गवाह रहा है। अप्रैल 2011 में, सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए एक मज़बूत लोकपाल कानून की मांग को लेकर वहां भूख हड़ताल शुरू की थी। यह आंदोलन देशव्यापी बन गया और इसने आने वाले वर्षों में देश की राजनीतिक तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई। यह जगह 2023 में पहलवानों के विरोध-प्रदर्शन का भी केंद्र बनी, जब ओलंपिक पदक विजेताओं और अन्य पहलवानों ने रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्कालीन प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए लंबे समय तक प्रदर्शन किया।
जंतर-मंतर नागरिकता संशोधन कानून, किसानों की मांगों और कई अन्य राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर हुए विरोध-प्रदर्शनों का भी गवाह रहा है। जंतर-मंतर से पहले, इंडिया गेट के पास बोट क्लब लॉन विरोध-प्रदर्शन की मुख्य जगह हुआ करता था। 1988 में महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में हुए किसानों के बड़े आंदोलन के कारण मध्य दिल्ली में भारी भीड़ जुटने के बाद इस जगह पर पाबंदियां लगा दी गईं। इसके बाद अधिकारियों ने वहां प्रदर्शनों पर रोक लगा दी और 1993 में जंतर-मंतर राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के लिए मुख्य जगह के तौर पर सामने आया।
CJP के विरोध-प्रदर्शनों के बीच बदलाव
यह फैसला राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों के बढ़ने के बीच लिया गया है। 12 अक्टूबर को, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के दिल्ली पुलिस से संपर्क करने की उम्मीद थी। वे जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए तारीख़ तय करने की मांग करने वाले थे। उनकी मांग थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन) को रोका जाए। यह कदम दिल्ली में हाल ही में हुए प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद उठाया गया है। इस स्टैंडिंग ऑर्डर में यह साफ़ नहीं बताया गया है कि प्रदर्शनों के लिए पहले से मौजूद या लंबित अनुरोधों पर कैसे कार्रवाई की जाएगी। उम्मीद है कि संशोधित SOP में तीन नई तय जगहों पर विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने की प्रक्रिया के बारे में और जानकारी दी जाएगी।















