नई दिल्ली। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा है कि विपक्षी नेताओं की ओर से उठाए गए मुद्दे अदालत में विचाराधीन हैं, ऐसे में उनके साथ मुलाकात करना "पूर्व स्थापित नैतिक मानदंडों और न्यायिक मर्यादा के खिलाफ होगा।" सीजेआई ने विपक्षी नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे पत्र में सोमवार को मुलाकात करने से इनकार कर दिया और कहा कि लंबित मामलों पर चर्चा करना उचित नहीं होगा। उन्होंने दोनों नेताओं से आग्रह किया कि वे अपनी याचिका अदालत में जाकर या ऑनलाइन दाखिल करें।
उन्होंने कहा, "शुरुआत में ही यह ध्यान दिलाना जरूरी है कि उपरोक्त मुद्दे पहले से ही उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन हैं। इसलिए, लंबित मामलों पर चर्चा करने के लिए मुलाकात शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का पूरी तरह उल्लंघन होगा। यह सिद्धांत भारतीय संविधान के मूल ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसी मुलाकात पहले से तय नैतिक नियमों और न्यायिक मर्यादा के भी खिलाफ होगी।" उन्होंने कहा, "इस संदर्भ में मैं आपको यह भी याद दिलाना चाहता हूं कि हमारे संवैधानिक ढांचे के तहत, उच्चतम न्यायालय को आपके पत्र में उठाए गए मुद्दों पर प्रशासनिक रूप से कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।"
गांधी और खरगे के पत्र के जवाब में प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 32 और न्यायिक समीक्षा समेत विभिन्न अधिकारों के तहत, हम न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से भारत के नागरिकों को प्रभावित करने वाले गंभीर मुद्दों पर विचार करने के लिए बाध्य हैं।" कांग्रेस ने सोमवार को प्रधान न्यायाधीश का यह पत्र साझा किया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नागरिक कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत किसी भी समय अपने अधिकारों के सिलसिले में अदालत का रुख कर सकते हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "इसलिए, प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन सौंपने के बजाय आपके लिए उच्चतम न्यायालय की न्यायिक शक्तियों का इस्तेमाल करना अधिक उचित होगा।"
उन्होंने कहा कि संयोग से, इसी तरह के मुद्दों को उजागर करने वाले कुछ मामलों की सुनवाई मंगलवार को होनी है। प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अगर उचित लगे, तो नेता सोमवार को अपनी याचिका दाखिल कर सकते हैं। सीजेआई ने कहा कि याचिका या तो पूर्वाह्न 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच उच्चतम न्यायालय में भौतिक रूप से या फिर ई-फाइलिंग विकल्प का उपयोग करके दाखिल की जा सकती है। उन्होंने पत्र में कहा, "आपको मेरा आश्वासन है कि कानून के अनुसार ऐसी किसी भी याचिका पर जल्द से जल्द अवसर पर सुनवाई की जाएगी।"















