डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने बांग्लादेश के साथ गंगा जल बँटवारे से जुड़े मुद्दों की जाँच करने का निर्णय लिया है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच साझा नदियों से संबंधित विवादों के समाधान हेतु एक स्थापित द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है। गंगा जल समझौते से जुड़े मामलों को इस सहयोग ढाँचे के अंतर्गत ही संभाला जाएगा। यह समझौता दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाला है, जिसके नवीनीकरण को भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बांग्लादेशी मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच 54 साझा नदियों के मुद्दों को सुलझाने के लिए संयुक्त नदी आयोग एक संरचित तंत्र है। जायसवाल ने कहा कि इन मुद्दों को द्विपक्षीय सहयोग के हिस्से के रूप में ही देखा जाएगा। बांग्लादेशी मंत्री आलमगीर ने कहा कि गंगा जल समझौते (फरक्का संधि) का नवीनीकरण दोनों देशों के संबंधों के भविष्य के लिए निर्णायक होगा। यह समझौता 1996 में हुआ था और सूखे के मौसम (जनवरी-मई) में गंगा के जल बँटवारे का 30 वर्षों का ढाँचा प्रदान करता है।








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