डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने एक ऐतिहासिक फैसले में हिंदू विवाह में मंगलसूत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा है कि पत्नी द्वारा इसे स्वेच्छा से निकालना पति के प्रति मानसिक यातना की श्रेणी में आता है। यह निर्णय 30 वर्षों से अलग रहने वाले एक वरिष्ठ दंपति के तलाक मामले में लिया गया, जहाँ अदालत ने पति को दिए गए फैसले को वैध ठहराया।
जस्टिस पी. वड़ामलई की अध्यक्षता वाली पीठ ने पत्नी की अपील खारिज करते हुए कहा कि हिंदू समाज में मंगलसूत्र वैवाहिक बंधन का प्रतीक और धार्मिक पहचान है। साथ ही, उन्होंने माना कि इतने लंबे अलगाव के बाद रिश्ते को बनाए रखने का कोई तर्क नहीं। अदालत ने पत्नी की दलीलों को तर्कहीन बताते हुए माना कि तलाक का आधार - क्रूरता और दीर्घकालिक अलगाव - वैध है।





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