ग्रेटर नोएडा के जिला एवं सत्र न्यायालय ने गैंगस्टर रवि काना की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। न्यायालय ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि आरोपी ने जमानत की शर्तों का पालन नहीं किया और जांच प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग नहीं दिया।
14 जनवरी को नोएडा के सेक्टर-63 की कोतवाली में शैलेंद्र शर्मा की शिकायत पर रवि काना के खिलाफ धमकी और जबरन वसूली के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। इसके साथ ही गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई चल रही है।
29 जनवरी को इस मामले में वारंट-बी जारी किया गया था, जब काना पहले से ही किसी अन्य मामले में जेल में बंद था। बाद में बिना न्यायिक अनुमति के जेल से रिहा होकर 11 फरवरी को उसने अग्रिम जमानत प्राप्त की। न्यायालय ने उस पर सात दिन के भीतर पुलिस के सामने हाजिर होने, जांच में सहयोग करने और गवाहों को प्रभावित न करने की शर्तें थोपी थीं, लेकिन पुलिस का आरोप है कि काना ने इनमें से कोई भी शर्त पूरी नहीं की।
14 फरवरी को पुलिस ने जमानत रद्द करने की अर्जी दायर की, जिसमें कहा गया कि आरोपी जानबूझकर न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन कर रहा है और गवाहों को प्रभावित करने तथा जांच से बचने की आशंका है। न्यायालय ने माना कि सुरक्षा चिंताएँ जांच से बचने का आधार नहीं बन सकतीं। रवि काना ने हाईकोर्ट से सुरक्षा प्राप्त की थी और निचली अदालत ने उसे सुविधानुसार पेश होने की छूट दी थी, लेकिन फिर भी वह हाजिर नहीं हुआ और फेसटाइम के माध्यम से बयान दर्ज कराने की मांग करने लगा।
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए न्यायालय ने कहा कि आरोपी का व्यवहार संदिग्ध रहा है। अब रवि काना के पास आत्मसमर्पण करने और जांच में पूर्ण सहयोग देने के अलावा कोई वैध विकल्प नहीं बचा है।

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