नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन बिल को मंजूरी नहीं मिल सकी। शुक्रवार शाम हुई वोटिंग में बिल को आवश्यक समर्थन नहीं मिला और यह पास होने से रह गया। कुल 528 वोट पड़े, जिनमें से 298 पक्ष में और 230 विरोध में थे। जबकि इस बिल को पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट जरूरी थे। इस तरह यह प्रस्ताव जरूरी आंकड़े से 54 वोट पीछे रह गया और महिलाओं से जुड़ी बड़ी उम्मीदों को झटका लगा।
इससे पहले सदन में इस मुद्दे पर जबरदस्त बहस देखने को मिली। सत्ता पक्ष ने इसे महिलाओं को राजनीति में मजबूत भागीदारी देने की दिशा में अहम कदम बताया, वहीं विपक्ष ने इसके प्रावधानों और समयसीमा को लेकर सवाल खड़े किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों से समर्थन की अपील की, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिल के समर्थन में कहा कि देश में कई संसदीय क्षेत्रों के बीच मतदाताओं की संख्या में भारी असमानता है। कहीं लाखों मतदाता हैं तो कहीं बहुत कम, जिससे प्रतिनिधित्व संतुलित नहीं रह पाता। उन्होंने कहा कि इसी असंतुलन को दूर करने के लिए समय-समय पर परिसीमन जरूरी होता है, ताकि सांसद अपने क्षेत्र की जिम्मेदारी बेहतर तरीके से निभा सकें।
वहीं विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस विधेयक को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और इसे “छलावा” बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव वास्तविक महिला सशक्तिकरण के बजाय एक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा ज्यादा लगता है। राहुल ने आरोप लगाया कि इस बिल के जरिए चुनावी नक्शे में बदलाव की कोशिश हो रही है और असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।
कुल मिलाकर, जहां सरकार इसे महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में बड़ा कदम मान रही है, वहीं विपक्ष इसे व्यापक राजनीतिक गणित से जोड़कर देख रहा है।















