लखनऊ। उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपनी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी (SP) के साथ गठबंधन में चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही कांग्रेस इस बार कम से कम 125 सीटों पर अपनी दावेदारी ठोकने की रणनीति बना रही है। सीटों के इसी मोल-भाव को अंतिम रूप देने के लिए पार्टी में बैठकों का दौर भी शुरू हो चुका है।
एनडीटीवी के मुताबिक, सीट बंटवारे की इस पूरी कवायद को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी खुद लीड कर रही हैं। सोमवार को उन्होंने यूपी कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं के साथ करीब तीन घंटे तक मैराथन बैठक की। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि इस बैठक में राज्य की लगभग 175 सीटों के समीकरणों पर बारीक चर्चा हुई।
कांग्रेस का तीन कैटेगरी वाला फार्मूला
गठबंधन की मेज पर जाने से पहले कांग्रेस ने अपनी संभावित सीटों का एक तीन-स्तरीय खाका तैयार किया है:
कैटेगरी A (100 सीटें): ये वो सीटें हैं जहां पार्टी अपनी जीत को लेकर सबसे ज्यादा आश्वस्त है।
कैटेगरी B (40-50 सीटें): यहां पार्टी का जनाधार ठीक-ठाक है और थोड़े प्रयास से जीत मुमकिन है।
कैटेगरी C (25-35 सीटें): ये सीटें वैकल्पिक या मोल-भाव के लिए रखी गई हैं।
खबर है कि इस हफ्ते प्रियंका गांधी यूपी के नेताओं के साथ एक और बैठक करेंगी। इसके बाद कांग्रेस अपनी 125 से 150 सीटों की फाइनल विशलिस्ट अखिलेश यादव के सामने रखेगी। पार्टी की कोशिश है कि नवंबर तक सीट बंटवारे का यह मसला हर हाल में सुलझा लिया जाए।
2024 के लोकसभा चुनावों में सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस को जबरदस्त फायदा मिला था। पार्टी ने राज्य की 17 में से 6 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसी प्रदर्शन के दम पर कांग्रेस अब हर एक लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली कम से कम एक विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ना चाहती है।
2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो कांग्रेस राज्य की 38 विधानसभा सीटों पर पहले नंबर पर थी, जबकि 42 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही। पार्टी ने इन सभी 80 सीटों को अपनी दावेदारी लिस्ट में सबसे ऊपर रखा है। इसके अलावा अजय राय, अजय लल्लू, सुप्रिया श्रीनेत और नदीम जावेद जैसे बड़े नेताओं की सीटों को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस इस बार अमेठी, रायबरेली और सहारनपुर की उन सीटों पर भी दावा ठोकने की तैयारी में है जहां अभी समाजवादी पार्टी के विधायक हैं।
भले ही अमेठी और रायबरेली को गांधी परिवार का गढ़ माना जाता है और लोकसभा में कांग्रेस यहां से जीतती आई है, लेकिन विधानसभा चुनावों में यहां का इतिहास बहुत सुहाना नहीं रहा है।















