डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का पोर्टल लॉन्च किया है। इसकी अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। करदाताओं को स्रोत पर कर कटौती (TDS) और वित्तीय लेनदेन विवरण (SFT) की सटीक जानकारी प्रदान करनी होगी। ITR-1, ITR-2 और ITR-4 फॉर्म भरते समय किसी भी प्रकार की विसंगति या त्रुटि पर दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। इसलिए, जल्दबाजी में रिटर्न भरने से बचें और सभी विवरण सावधानीपूर्वक भरें।
कई करदाता आकलन वर्ष की शुरुआत में ही रिटर्न दाखिल कर देते हैं, लेकिन इस समय तक नियोक्ता कंपनियों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा TDS/SFT डेटा अपलोड नहीं होता। नियोक्ता कंपनियों के अलावा बैंक, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थान 31 मई तक पिछले वित्तीय वर्ष का TDS/SFT डेटा जमा करते हैं। वेतन, ब्याज, किराया और कमीशन जैसे भुगतानों पर पहले से कटे कर के कारण करदाताओं के स्वयं के रिकॉर्ड और विभाग के डेटा में असंगतता हो सकती है।
नकद जमा, भारी क्रेडिट कार्ड लेनदेन, शेयर/म्यूचुअल फंड में बड़े निवेश या अन्य वित्तीय गतिविधियों में विसंगतियों पर आयकर विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है। कर विशेषज्ञ नितिन सिंह के अनुसार, फाइलिंग सुविधा उपलब्ध होने पर भी जल्दबाजी में रिटर्न न भरें। डिजिटल और डेटा-आधारित प्रणाली के कारण बैंकों से प्राप्त वित्तीय जानकारी के बिना रिटर्न भरने पर नोटिस, टैक्स डिमांड या 5 हज़ार रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
ITR फॉर्म विवरण:
- ITR-1 (सहज): 50 लाख रुपये तक की आय वाले करदाता (वेतन/संपत्ति/ब्याज आय)
- ITR-2: पूंजीगत लाभ प्राप्त करने वाले गैर-व्यवसायिक करदाता
- ITR-3: व्यवसाय/पूंजीगत लाभ से आय वाले करदाता
- ITR-4 (सुगम): 50 लाख रुपये तक आय वाले व्यक्तिगत/एचयूएफ
- ITR-5/6: एलएलपी/कंपनियों के लिए
- ITR-7: विशिष्ट धाराओं के तहत दाखिल करने वाले संस्थान


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