अरविंद पांडेय। जागरण। नई दिल्ली। नीट-यूजी के पेपर लीक के बाद एनटीए द्वारा सुधार के दावों पर सवाल उठे हैं, क्योंकि पेपर लीक रोकने वाली प्रमुख सिफारिशों को अभी तक लागू नहीं किया गया है। संसदीय समिति की रिपोर्ट के बावजूद, परीक्षा को कंप्यूटर-आधारित मोड में आयोजित करने और प्रश्नपत्रों की सुरक्षित छपाई व वितरण जैसे महत्वपूर्ण सुझावों को नहीं अपनाया गया है।
एनटीए ने हाल ही में संसदीय समिति के समक्ष यह स्वीकार किया कि दीर्घकालिक सुधारों पर काम चल रहा है, जबकि समिति ने अपनी सिफारिशें 21 अक्टूबर 2024 को ही प्रस्तुत कर दी थीं। विशेषज्ञों के अनुसार, समिति ने पेपर लीक से बचाव के लिए पेन-पेपर मोड में परीक्षा आयोजित करने की स्थिति में प्रश्नपत्रों की छपाई के लिए बाहरी प्रिंटिंग प्रेस के बजाय एनटीए के परिसर में स्वयं प्रिंटिंग यूनिट स्थापित करने का सुझाव दिया था। वर्तमान में वित्त मंत्रालय के पास केंद्रीय बजट की छपाई के लिए ऐसी ही व्यवस्था है।
समिति ने प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक परिवहन के बजाय परीक्षा से आधे घंटे पहले सुरक्षित नेटवर्क के माध्यम से भेजने का भी प्रस्ताव रखा था, जिसे जेईई मेन परीक्षा में लागू किया जा चुका है। इसके अलावा, प्रश्नपत्रों को वायु सेना के विमानों से पहुँचाने पर विचार करने की बात कही गई। साथ ही, एनटीए को प्रशिक्षण देने और संस्थान को मजबूत बनाने के सुझावों को नजरअंदाज किया गया।
पेपर लीक के बाद दो संयुक्त सचिव और दो निदेशक स्तर के अधिकारियों की त्वरित नियुक्ति की गई, जबकि चीफ टेक्नीकल ऑफिसर, चीफ फाइनेंस ऑफिसर और जीएम (एचआर) जैसे पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई। यह भी चिंता का विषय है कि सिफारिशों को लागू करने के लिए गठित समिति ने इस दिशा में कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया, खासकर जब इस समिति और निगरानी समिति के अध्यक्ष इसरो के पूर्व प्रमुख राधाकृष्णन ही थे।
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