डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कर्नाटक में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच सिद्दरमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और अब उम्मीद है कि डी.के. शिवकुमार राज्य के नए मुख्यमंत्री बनेंगे। नए प्रशासन के सामने राजनीतिक, प्रशासनिक और आर्थिक मोर्चों पर कई जटिल चुनौतियाँ खड़ी हैं।
1. **मंत्रिमंडल संरचना**: शिवकुमार के लिए सबसे बड़ी चुनौती मंत्रियों की परिषद चुनना है। कांग्रेस के भीतर प्रभावशाली जातिगत समूहों, क्षेत्रीय दलों और गुटों के बीच प्रतिस्पर्धी मांगों के कारण मंत्रालयों का बँटवारा जटिल हो सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के समर्थकों और शिवकुमार के समर्थक गुटों के बीच तनाव से क्षेत्रीय-जातीय संतुलन बनाना मुश्किल होगा।
2. **अहिंदा गठबंधन का समर्थन**: अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों के इस सामाजिक गठबंधन ने 2023 में कांग्रेस की वापसी में अहम भूमिका निभाई थी। शिवकुमार को इन समुदायों के हितों की रक्षा का आश्वासन देना होगा, नहीं तो विपक्षी भाजपा-जेडीएस को लाभ मिल सकता है।
3. **वित्तीय प्रबंधन**: सरकार पांच योजनाओं (गृह लक्ष्मी, शक्ति, अन्न भाग्य आदि) पर सालाना 51,000 करोड़ रुपये खर्च करती है। अर्थशास्त्रियों की चिंता राजकोषीय दबाव और पूंजीगत व्यय पर इसके प्रभाव को लेकर है, लेकिन कल्याणकारी योजनाओं में कटौती राजनीतिक जोखिम भरी होगी।
4. **ग्रामीण विकास**: बेंगलुरु के बाहर के क्षेत्रों में सिंचाई, ग्रामीण बुनियादी ढाँचे और कृषि सहायता को प्राथमिकता देने की मांग है। किसानों की सूखे और बाजार की अस्थिरता से जुड़ी समस्याएँ प्रशासन के लिए चुनौती हैं।
5. **मेकेदातु-कावेरी विवाद**: बेंगलुरु की जल आपूर्ति और तमिलनाडु के हितों के बीच संतुलन बनाना शिवकुमार के लिए महत्वपूर्ण होगा। मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वोयर पर चल रहे तनाव को संभालना उनके कार्यकाल की प्रमुख परीक्षा होगी।


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