डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कर्नाटक कांग्रेस ने सिद्दरमैया के नेतृत्व की तीन साल बाद डीके शिवकुमार को ज़िम्मेदारी सौंपी है। यह निर्णय सत्ता विरोधी प्रवृत्ति से निपटने और 2028 के विधानसभा तथा 2029 के लोकसभा चुनावों की तैयारी को ध्यान में रखकर लिया गया है। सिद्दरमैया और शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर पहले हुए समझौते के आधार पर यह परिवर्तन हुआ है।
राज्य में लगातार नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं ने कांग्रेस की छवि को प्रभावित किया है। शिवकुमार से तीन प्रमुख अपेक्षाएँ जुड़ी हैं - शहरी मतदाता व युवाओं का समर्थन हासिल करना, वोक्कलिगा समुदाय को एकजुट करना और शासन में नई रणनीति लाना। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है यह कदम सत्ता में रहने वाली पार्टियों के सामने आने वाली चुनौतियों को पूरा करेगा।
शिवकुमार का बेंगलुरु और मैसूर क्षेत्रों में मजबूत किसान समुदाय से जुड़ाव है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी-जेडीएस गठबंधन ने कांग्रेस को झटका दिया। एक साल पहले हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा था। शिवकुमार की विशिष्ट राजनीतिक शैली और संगठनात्मक पकड़ से शहरी वोटरों को आकर्षित करने की उम्मीद है।
सिद्दरमैया के राज्यसभा न जाने को लेकर पार्टी के भीतर विभिन्न अनुमान हैं। 'अहिंदा' गठबंधन की नींव मजबूत रहने की अपेक्षा है। भविष्य में नए सामाजिक समूहों को जोड़कर सत्ता विरोधी प्रवृत्ति के प्रभाव को कम करने की रणनीति पर चर्चा चल रही है।
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