डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दो महत्वपूर्ण फैसले सुनाए। एक ओर हाई कोर्टों के लिए फैसले सुनाने की तीन महीने की समयसीमा तय की, तो दूसरी ओर दिल्ली के 1984 के एक 42 साल पुराने दोहरे हत्याकांड के मामले में 15 महीने से सुरक्षित रखे फैसले को स्वीकार किया। जुलाई 1984 में सिविल लाइंस और अलीपुर में तीन दिन के अंतराल में ट्रक चालक और सहायक की लाशें मिलीं। दिल्ली पुलिस ने दो हफ्ते के भीतर संदिग्धों को गिरफ्तार कर ट्रक चोरी के इरादे से हत्या का आरोप लगाया। 2008 में सेशंस कोर्ट ने दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ की और 2009 में आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को सुरक्षित रखा, जिसके बाद 2013 में दिल्ली हाई कोर्ट ने अपील खारिज कर दी। एक आरोपी गोपी चंद उर्फ पप्पू ने 2013 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने पिछले साल 27 फरवरी को अंतिम तर्क सुने और फैसला सुरक्षित रखा। यह फैसला जस्टिस मिश्रा के पास 15 महीने तक लंबित रहा। शुक्रवार को फैसला पढ़ते हुए जस्टिस मनोज मिश्रा ने कहा कि अभियोजन ने साबित किया कि पांच लोगों ने ट्रक चोरी की साजिश में ड्राइवर और सहायक को मार डाला। बेंच ने सजा को 18 साल की कैद में बदल दिया, जो आरोपी ने पहले ही काट लिया था। इससे पहले फरवरी में एक अन्य मामले में 14 महीने से सुरक्षित फैसले को सुनाया गया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाई कोर्टों को समयसीमा का पालन करने का निर्देश देते हुए कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार केवल तेज सुनवाई तक सीमित नहीं है।


-1780248434452.webp)

-1780247613403.webp)




-1780244886627.webp)





