नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह 22 अक्टूबर को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई करेगा। नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के उस नोटिस के खिलाफ याचिका दायर की है, जिसमें उनसे एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के समक्ष "शांति" बॉण्ड भरने के लिए कहा गया है। निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शनों में सबसे आगे रहीं बोरा ने इस नोटिस को रद्द करने और पुलिस को यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि वह उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करे।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने बोरा के वकील के अनुरोध पर याचिका पर सुनवाई टाल दी। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 के तहत 17 अक्टूबर को जारी नोटिस में, छात्र नेता से कहा गया है कि वह 19 अक्टूबर को एसईएम के सामने पेश हों और कारण बताएं कि "जांच की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए" उनसे 10,000 रुपये का निजी मुचलका और एक जमानत क्यों न ली जाए। धारा 126 एसईएम को ऐसे बॉण्ड पर हस्ताक्षर करवाने का अधिकार देती है, यदि इस बारे में विश्वसनीय जानकारी हो कि कोई व्यक्ति शांति भंग कर सकता है, सार्वजनिक व्यवस्था में खलल डाल सकता है, या कोई ऐसा गलत काम कर सकता है जिससे अशांति पैदा हो सकती है।















