नई दिल्ली। CEC ज्ञानेश कुमार और SIR पर उपजे विवादों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया को अवैध या असंवैधानिक तरीकों से बाधित करने की कोशिशों पर कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा है कि हालांकि संवैधानिक अदालतें आमतौर पर चुनाव प्रक्रिया में दखल नहीं देतीं, लेकिन जब यह सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करना जरूरी हो कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव असंवैधानिक या अवैध तरीकों से दूषित न हों, तो अदालतों के हाथ बंधे नहीं होते।
शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी, 'युवजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी' (YSRCP) को अंतरिम राहत देते हुए की। पार्टी ने आरोप लगाया था कि हिंसा और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के कारण उसके उम्मीदवारों को शहरी स्थानीय निकाय चुनावों (Urban Local Body elections) के लिए नामांकन दाखिल करने से रोका गया। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने माना कि पार्टी ने प्रथम दृष्टया ऐसा मामला पेश किया है, जिसमें नामांकन प्रक्रिया की शुचिता की रक्षा के लिए निर्देश देना जरूरी है। इसलिए, बेंच ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह YSRCP की उस मांग पर विचार करे, जिसमें नामांकन की समय-सीमा बढ़ाने को कहा गया है। पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हुई हिंसा की शिकायत की थी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह सीधे तौर पर चुनाव प्रक्रिया में दखल नहीं दे रहा है, बल्कि आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग (SEC) को पार्टी की शिकायत पर विचार करने और उचित निर्णय लेने की अनुमति दे रहा है। कोर्ट ने SEC को यह भी निर्देश दिया कि वह 21 अक्टूबर को उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी न करे और इसे 23 अक्टूबर तक टाल दे। YSRCP ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया था कि हिंसा और बाधाओं के कारण उसके लगभग दो-तिहाई उम्मीदवारों को शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने से रोक दिया गया।















