नई दिल्ली। त्योहारों की रौनक बाजारों में भले ही दिखाई देने लगी हो, लेकिन घरों की रसोई में इसका असर बढ़ते खर्च के रूप में महसूस हो रहा है। रोजमर्रा की थाली में शामिल दाल-चावल से लेकर त्योहार पर बनने वाली मिठाइयों और पकवानों में इस्तेमाल होने वाले मेवे तक, खरीदारी का बजट बढ़ गया है। दिल्ली के थोक बाजारों में खाद्यान्न की कीमतों के साथ त्योहार से पहले ड्राई फ्रूट्स की मांग बढ़ रही है। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो त्योहार की खरीदारी के साथ महीने का राशन भी जुटा रहे हैं।
अखिल भारतीय थोक औसत में चावल करीब ₹4,205 प्रति क्विंटल रहा। एक महीने पहले यह करीब ₹4,121 प्रति क्विंटल था। यानी महीने भर में करीब दो फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई। छह महीने पहले की तुलना में चावल की कीमत में करीब 12 फीसदी से अधिक का अंतर है। चना दाल का औसत थोक भाव भी करीब ₹6,995 प्रति क्विंटल रहा।
दिल्ली के बाजार में हालांकि गुणवत्ता, किस्म और कारोबारी स्तर के हिसाब से वास्तविक भाव अलग हो सकते हैं। दिल्ली सरकार की उपलब्ध आधिकारिक साप्ताहिक थोक सूची फिलहाल 31 जुलाई तक की है, इसलिए मौजूदा बाजार भाव को स्थानीय कारोबारियों के भाव से ही मिलाकर देखना होगा।
त्योहारों के साथ पुरानी दिल्ली का खारी बावली बाजार एक बार फिर मेवा कारोबार का बड़ा केंद्र बन गया है। काजू, बादाम, किशमिश, पिस्ता और अखरोट की खरीदारी बढ़ रही है। खारी बावली देश के प्रमुख ड्राई फ्रूट थोक बाजारों में शामिल है और यहां अलग-अलग गुणवत्ता के मेवे अलग-अलग भाव पर मिलते हैं। पिछले त्योहार सीजन में प्रकाशित खारी बावली के बाजार भाव में वन पीस काजू करीब ₹760 किलो, बादाम ₹650 किलो, किशमिश ₹300 किलो, अखरोट की गिरी करीब ₹1,000 किलो और पिस्ता करीब ₹1,100 किलो बताया गया था। इन आंकड़ों को मौजूदा 5 अक्टूबर के भाव के बजाय पिछले बाजार संदर्भ के तौर पर देखना चाहिए।
बाजार में खरीदारी करने वाले ग्राहकों का कहना है कि त्योहार पर खर्च पहले से तय करना मुश्किल हो गया है। एक किलो की जगह आधा किलो मेवा, कम मात्रा में मिठाई और जरूरी सामान की प्राथमिकता तय करना अब आम परिवारों की मजबूरी बनती जा रही है। एक ग्राहक ने कहा, त्योहार में बच्चों और मेहमानों के लिए मिठाई और मेवा लेना जरूरी है, लेकिन राशन का खर्च भी बढ़ गया है। इसलिए इस बार हर चीज थोड़ी-थोड़ी खरीद रहे हैं। दूसरे खरीदार ने कहा, काजू-बादाम के भाव पूछने के बाद मात्रा कम करनी पड़ती है। पहले त्योहार के लिए खुलकर खरीदारी करते थे, अब पहले बजट देखते हैं।
खारी बावली के कारोबारियों के मुताबिक त्योहार नजदीक आने के साथ ड्राई फ्रूट्स की मांग बढ़ती है। हालांकि कीमत को लेकर ग्राहक पहले से ज्यादा सतर्क हैं। कई खरीदार अलग-अलग दुकानों पर भाव पूछने के बाद सौदा कर रहे हैं। बाजार में अलग-अलग गुणवत्ता के कारण एक ही मेवे के भाव में भी काफी अंतर देखने को मिल सकता है। कारोबारियों के अनुसार थोक बाजार में बड़ी मात्रा में खरीदारी करने पर कीमत अपेक्षाकृत कम पड़ती है, जबकि छोटी मात्रा में खरीदारी करने वाले ग्राहक को अधिक भाव चुकाना पड़ सकता है।















